पलायन रुका , खेत लहलहाए - चेतरात पवार महाराष्ट्र के धुले जिले के अत्यंत पिछड़े व साधनहीन गाँव बारीपाड़ा में जन्म , तंगहाली के बीच एम. कॉम . तक पढ़ाई की । नौकरी मिल रही थी , परन्तु ठान लिया कि नौकरी करने बाहर नहीं जाना है। गाँव वालों को साथ लेकर गाँव में खुशहाली लानी है। खेतों , जंगलों को हरा-भरा बनाना है। कुओं और तालाबों को पानी से सराबोर करना है। गाँव के लोगों को जल , जंगल , जमीन , जानवर और जन का महत्व बताया। वन संरक्षण समिति गठित कर के शुरुआत जंगल बचाने से की। चेतराम के निर्देशन और वनवासी कल्याण आश्रम के सहयोग से न्यूनतम लागत से अधिकतम पैदावार हासिल करने की मुहिम रंग लाने लगी। वर्ष भर में दो फसलों की पैदावार लाई खेतों में जान और लोगों के घर खुशहाली। देश-विदेश में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने विशेष सम्मान अर्पित किया। ⇓ मुम्बई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में चैतराम जी की बात सुन कर फिल्म कलाकार अक्षय कुमार भी अचंबित हो गए। मैं गाँव का किसान हूँ , कोई विशेषज्ञ नहीं हूँ। मैंने...