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Showing posts from March, 2020
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पलायन रुका , खेत लहलहाए - चेतरात पवार महाराष्ट्र के धुले जिले के अत्यंत पिछड़े व साधनहीन गाँव बारीपाड़ा में जन्म , तंगहाली के बीच एम. कॉम . तक पढ़ाई की । नौकरी मिल रही थी , परन्तु ठान लिया कि नौकरी करने बाहर नहीं जाना है। गाँव वालों को साथ लेकर गाँव में खुशहाली लानी है। खेतों , जंगलों को हरा-भरा बनाना है। कुओं और तालाबों को पानी से सराबोर करना है। गाँव के लोगों को जल , जंगल , जमीन , जानवर और जन का महत्व बताया। वन संरक्षण समिति गठित कर के शुरुआत जंगल बचाने से की। चेतराम के निर्देशन और वनवासी कल्याण आश्रम के सहयोग से न्यूनतम लागत से अधिकतम पैदावार हासिल करने की मुहिम रंग लाने लगी। वर्ष भर में दो फसलों की पैदावार लाई खेतों में जान और लोगों के घर खुशहाली। देश-विदेश में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने विशेष सम्मान अर्पित किया। ⇓    मुम्बई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में  चैतराम जी की बात सुन कर  फिल्म कलाकार अक्षय कुमार भी अचंबित हो गए।    मैं गाँव का किसान हूँ , कोई विशेषज्ञ  नहीं हूँ। मैंने...
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प्रथम मासिक स्मृतिदिन निमित्त सादर नमन एक उत्तम मनोविश्लेषक - बालासाहब दीक्षित ---------------------------------------------------------------------------------------- बालासाहब कहते थे-कल्याण आश्रम का कार्य ईश्वरी कार्य है ,   अतः अपना कार्य  ‘ अध्यात्मिक कार्य ’  है। ---------------------------------------------------------------------------------------- बालासाहब कहते ही कार्यकर्ताओं को कल्याण आश्रम के स्थापक का स्मरण होना स्वाभाविक है। बालासाहब देशपाण्डे और बालासाहब दीक्षित दोनों एक ही पथ पर चलने वाले पथिक। दोनों का आदर्श डा. हेडगेवार। दोनों का जीवन एक समान , अर्थात अनेकों के लिए प्रेरक । अंतर केवल इतना कि एक थे विवाहित तो दूसरे संघ प्रचारक। आज हम यहाँ बालासाहब दीक्षित की बात करेंगे।   जिनकी इस जगत की विदाय से केवल एक मास हुआ है। नाशिक से रात 03 बजकर 10 मिनट को संदेश मिला कि बालासाहब दीक्षित शांत हो गये। हम सब जानते है कि ‘ जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु अटल है ’ परन्तु कुछ व्यक्तित्व एसे होते है कि इस जगत से विदा होने पर भी प्र...

जंगल टुरिजम नई कल्पना, या नया संकट ?

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जंगल टुरिजम  नई कल्पना, या नया संकट ? - आनंद इशिता खन्ना पर्यटन उद्योग में एक युवा नाम। ये महिला उद्योजक पर्यटाकों को घर जैसी सुविधा देने में जानी जाती है। उनके द्वारा ग्रामीणों को इसके लिए प्रशिक्षित भी किया गया। पर्यटाकों को मिले अच्छी सुविधा और ग्रामीणों का हो आर्थिक लाभ ऐसे दो लक्ष्य एक साथ। हिमाचल के वन क्षेत्र मंे प्रारम्भ हुए इस टुरिझम उद्योग का विस्तार अब मध्यप्रदेश और कर्नाटक के जंगलों में होने जा रहा है। पहले कभी सिक्किम और लद्दाख में इसे सफलता मिली है। शहर में रहनेवाले जंगलों में घूमने जाने का प्रतिशत जैसे बढ़ते जा रहा है, वैसे ही इसका महत्व बढ़ते जाएगा। कैसा विरोधाभास है, देखिए! जंगल में रहने वालो की आवश्यकता बहुत कम रहती है।  वे थोडे़ मंे गुजारा कर लेते है और शहर में रहने वालों को थोड़ी सी भी असुविधा नहीं चलता।  तुरंत अस्वस्थ हो जाते है। जो मिला उसमें समाधान मानने का तो वनवासियों से ही सिखें। सरकार की स्टार्ट-अप् योजना अंतर्गत भी इसे प्रोत्साहन मिलने के समाचार है। जैसे-जैसे आर्थिक लाभ होगा, जंगल में रहने वाले व्यक्तियों का आकर्षण बढ़ते जाएगा। प...