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Showing posts from April, 2020
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राम काज करीबे को आतूर   - - आनंद हनुमान , श्रीराम के भक्त भी है और हम सबके भगवान भी। कहते है की भक्ति कैसी ?, तो हनुमान जैसी और भगवान कैसे ?, तो वह भी हनुमान जैसे। कैसा आश्चर्य है ! एक ही आदर्श के दो रूप !   हनुमान के दर्शन करना , उन्हें तेल चढ़ा ना, नियमित रूप में पूजा-अर्चना करना , शनिवार को समूह में हनुमान चालिसा के पाठ करना , यह देश के गई गाँवों में आज भी होता है , जनजाति क्षेत्र के  गाँवों  भी।  वैसे भी जग चाहे कितना भी भौतिक हो जाए , परन्तु भारतीय समाज में धर्म का स्थान विशेष होने के कारण भगवान की पूजा सर्वत्र देखने को मिलती है। केवल कम पढ़े-लिखें ही नहीं परन्तु विज्ञान के किसी विषय में संशोधन   करने वाले युवक  भी  हनुमान को अपना भगवान मानते हैं। हम आज यहाँ हनुमान को भगवान के रूप में नहीं परन्तु एक आदर्श सेवक के रूप में देखेंगे। सार्वजनिक जीवन में सेवा कार्य में कार्यरत हम सबके वे मार्गदर्शक है। राम कार्य के बीना, जिनका मन किसी दूसरे काम में नहीं लगता , उतना एकाग्र चि त्त यदि हमारा अपने कार्य में रहे, तो सफलता के प...
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आज रावनवमी है। रामजन्मोत्सव पर सादर प्रेषित ‘ राम राम ’ न केवल अभिवादन यह तो जीवन रक्षक मंत्र है   एक सज्जन , बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था। एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया। छुट्टी का वक्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है। वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा। अब जब मौत सामने दिख ने लगी तो भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा। अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया , अहिल्या को पत्थर से नारि बनाया , शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया। प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व ध र्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो। मेरी पत्नी-बच्चे मेरी प्रतिक्षा कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में केवल मैं ही हूँ। मैं प ू रे जीवन भर आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आ ँ ख...