राम काज करीबे को आतूर - - आनंद हनुमान , श्रीराम के भक्त भी है और हम सबके भगवान भी। कहते है की भक्ति कैसी ?, तो हनुमान जैसी और भगवान कैसे ?, तो वह भी हनुमान जैसे। कैसा आश्चर्य है ! एक ही आदर्श के दो रूप ! हनुमान के दर्शन करना , उन्हें तेल चढ़ा ना, नियमित रूप में पूजा-अर्चना करना , शनिवार को समूह में हनुमान चालिसा के पाठ करना , यह देश के गई गाँवों में आज भी होता है , जनजाति क्षेत्र के गाँवों भी। वैसे भी जग चाहे कितना भी भौतिक हो जाए , परन्तु भारतीय समाज में धर्म का स्थान विशेष होने के कारण भगवान की पूजा सर्वत्र देखने को मिलती है। केवल कम पढ़े-लिखें ही नहीं परन्तु विज्ञान के किसी विषय में संशोधन करने वाले युवक भी हनुमान को अपना भगवान मानते हैं। हम आज यहाँ हनुमान को भगवान के रूप में नहीं परन्तु एक आदर्श सेवक के रूप में देखेंगे। सार्वजनिक जीवन में सेवा कार्य में कार्यरत हम सबके वे मार्गदर्शक है। राम कार्य के बीना, जिनका मन किसी दूसरे काम में नहीं लगता , उतना एकाग्र चि त्त यदि हमारा अपने कार्य में रहे, तो सफलता के प...