संस्कृति और आस्था अविभाज्य है
- आनंद, दिल्ली जनजाति समाज की कई समस्याएँ है जैसे सामूहिक वनाधिकार, विस्थापन और पुर्नवास, भूमि अधिग्रहण ईत्यादी। जनजाति समाज का नेतृत्व करने वाले कुछ व्यक्तियों के साथ जब चर्चा सत्र का आयोजन हुआ तो एक और समस्या ध्यान में आई। वह है दोहरा लाभ लेने की समस्या। चर्चा में सम्मिलित सभी का एक मत था कि जनजाति समाज जीवन को प्रभावित करने वाली इस समस्या पर हमने काम करना चाहिए। चर्चा के अंत में एक स्वतंत्र मंच बनाने पर भी विचार हुआ। ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ इस नाम से मंच गठित हुआ। मंच के साथ देश भर के कई व्यक्ति जुड़ते गए। जनजाति समाज की परम्पराएं, रीति-रिवाज, आस्था को छोडकर जब एक व्यक्ति अन्य धर्म (जैसे इसाई अथवा मुस्लिम) में चला जाता है, तो उसे अन्य धर्मावलम्बि कहना चाहिए। उसे जनजाति अथवा आदिवासी कहना उचित नहीं होगा। जैसे अनुसूचित जाति का व्यक्ति अन्य धर्म में चलें जाने से उसकी अनुसूचित जाति की पहचान नहीं रहती। वैसे ही जनजाति समाज के बारे में होना चाहिए। बहुत वर्षों पूर्व इस सन्दर्भ में संविधान सभा में चर्चा चलीं थी। परन्तु उस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। लोकसभा सांसद स्व. कार्तिक उरा...